जन भागीदारी – अर्थ, विशेषताएं, सफलता, महत्व

जन भागीदारी

जन भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

जन भागीदारी – जन सहभागिता 

जन सहभागिता का अर्थ है सरकार के किसी भी प्रकार के कार्य में आम जनता की भागीदारी का होना। किसी भी लोकतांत्रिक तथा विकसित या विकासशील देश में जन भागीदारी का महत्व इतना महवपूर्ण हो गया है कि इन राष्ट्रों में जन भागीदारी से संबंधित कानून बनाए जा रहे है। भारत में भी कई कानून है जो जन भागीदारी को प्रोत्साहित करते है। 1966 में कॉलेजों में जन भागीदारी को बढ़ाने के लिए बनाया गया नियम इसका एक अच्छा उदाहरण है। 

भारत के वर्त्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी कहा है कि

“ जन भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। “

अतः हम कह सकते है की लोकतंत्र का एक अर्थ जन भागीदारी से भी लिया जा सकता है। प्रशासनिक जन भागीदारी को सबसे अधिक महत्वता दी जाती है। प्रशासनिक जनभागीदारी का विस्तृत वर्णन निम्न्लिखित है। 

प्रशासन में जन भागीदारी

प्रशासन में जन भागीदारी का अर्थ है कि ‘किसी भी प्रकार के प्रशासनिक कार्य में जनता की भागीदारी का होना’ 

किसी भी प्रशासन को सुचारु रूप से चलने के लिए प्रशासनिक जन भागीदारी का होना अति आवश्यक समझा जाता है क्यूंकि प्रशासन में जनता की भागीदारी होने के कारण प्रशासन जनता के प्रति जवावदेह होता है तथा प्रशासन किसी भी प्रकार का कोई गलत अथवा गैर क़ानूनी कार्य नहीं कर सकता। 

यदि प्रशासन में जनता की भागीदारी है तो किसी भी प्रकार की सरकारी निति अथवा कानून को सफलता प्राप्त करने में अधिक समय नहीं लगता है क्यूंकि उसको भारी जनसमर्थन प्राप्त होता है और इसी जनसमर्थन के प्रति प्रशासन जवावदेह भी होता है। 

जन सहभागिता पर आधारित सरकार (जनतांत्रिक सरकार) ‘लोकप्रिय प्रभुसत्ता के सिद्धांत’ के अनुसार कार्य करती है। इस सिद्धांत के अनुसार जनतंत्र में अंतिम सरकार जनता में निहित होती है अर्थात जनता सबसे ऊपर होती है। यह सिद्धांत किसी भी प्रतिनिधिक जनतंत्र को ‘भागीदारी जनतंत्र’ में बदल देता है। भागीदारी जनतंत्र का अर्थ प्रशासन या सरकार के कार्यों में जन भागीदारी के होने से है। 

किसी भी प्रशासन में जन भागीदारी के होने से उसमे कई प्रकार के सकारात्मक परिवर्तन होते है अथवा प्रशासन में कई प्रकार की विशेषताएं आती है, जिनका वर्णन निम्न है।

जन भागीदारी की विशेषताएं 

  1. जन भागीदारी से प्रशासन में जवावदेहिता आती है। 
  2. सरकारी नीतियां जल्दी सफलता प्राप्त करती है। 
  3. इसमें जनता सबसे ऊपर होती है तथा जनता का निर्णय सर्वोपरि माना जाता है। 
  4. प्रशासन में पारदर्शिता आती है। 
  5. भ्र्ष्टाचार में कमी आती है। 
  6. लाल फ़ीताशाही खत्म होती है। 
  7. प्रशासन में गलत कार्य होने की आशंका कम हो जाती है। 
  8. जन सहभागिता से सरकार के नियम तथा नीतियां भी प्रभावित होते है। 
  9. यह प्रशासन पर पहरेदारी का कार्य करता है। 
  10. जन सहभागिता से व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलता है। 
  11. सत्ता का दुरपयोग नहीं होता है। 
  12. सरकारी योजनाओं का उचित लाभ कमजोर वर्ग को मिलता है। 
  13. जन भगीदारी से प्रशानिक कुरीतिओं को दूर किया जा सकता है तथा जनता के लिए कार्य किया जा सकता है। 

इसके अतिरिक्त भी जन भागीदारी का प्रशासन में कहीं अधिक महत्व है। जन भागीदारी का अर्थ काफी व्यापक है और इसका कार्यक्षेत्र भी। किसी भी राष्ट्र का प्रशासन तब तक उचित कार्य तथा जनता के लिए कार्य नहीं कर सकता जब तक कि उसे जन सहभागिता न हो। 

जिस प्रकार से किसी परिवार में कोई निर्णय लेने से पहले परिवार के सभी सदस्यों की राय जान लेना महत्वपूर्ण माना जाता है उसी प्रकार यदि किसी भी प्रशासनिक निर्णय को लेने से पहले जनता का निर्णय अथवा जन भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए तो प्रशासन का प्रत्येक कार्य जनता के कल्याण के लिए ही होगा। आज के समय में प्रशासन का अर्थ ही ‘जनता के लिए‘ वाक्य से लिया जाता है इसलिए यदि प्रशासन को जनता के लिए कार्य करना है तथा जनता के प्रति उत्तरदाई रहना है तो प्रशासन में जन सहभागिता या जन भागीदारी का होना अति आवश्यक है। 

जन सहभागिता की सफलता और असफलता 

किसी भी प्रशासन में किसी भी प्रकार का कार्य क्यों न किया जाए उसकी सफलता और असफलता उस प्रशासन में काम कर रहे व्यक्तियों पर निर्भर करती है। यदि जन सहभागिता को प्रशासन में लाया जाता है तो इसकी कोई गारंटी नहीं है की यह सफल ही होगी। यदि प्रशासन तथा जनता समन्वय के साथ कार्य करते है तो जन सहभागिता निश्चित ही सफल होगी और जन सहभागिता में संचार का होना अति आवश्यक है। आपस के मन मुटावों को संचार तथा समन्वय से ही दूर किया जा सकता है। 

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