राष्ट्रपति की शक्तियां व कर्तव्य
राष्ट्रपति की शक्तियां व कर्तव्य

राष्ट्रपति की शक्तियां व कर्तव्य

संविधान के अनुसार भारत के राष्ट्रपति की शक्तियों को 7 भागो में बांटा गया है जोकि निम्नलिखित है –

  1. कार्यकारी शक्तियां
  2. विधायी शक्तियां
  3. वित्तीय शक्तियां
  4. न्यायिक शक्तियां
  5. कूटनीतिक शक्तियां
  6. सैन्य शक्तिया
  7. आपातकालीन शक्तियां

कार्यकारी शक्तियां 

संसद
संसद

भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक शासन के कार्य राष्ट्रपति के नाम पर ही किये जाते है और राष्ट्रपति प्रत्येक शासन के लिए नियमों का निर्माण करता है या कर सकता है ताकि राष्ट्रपति द्वारा या के नाम पर दिए जाने वाले सभी आदेश वैध हो। राष्ट्रपति राज्य और केंद्र (प्रधानमंत्री) से प्रशासनिक कार्यों के दस्तावेजों की मांग कर सकता है। राष्ट्रपति पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आयोग का निर्माण भी कर सकता है।

विधायी शक्तियां 

राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों का अर्थ संसद की शक्तिओं से है। राष्ट्रपति भारतीय संसद का एक अभिन अंग है क्यूंकि संसद राष्ट्रपति के बिना एक विधेयक भी पास नहीं कर सकती। राष्ट्रपति चाहे तो संसद की बैठक बुला सकता है और भंग भी कर सकता है। लोकसभा को विघटित करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है।

यदि लोकसभा में अध्यक्ष और उप-अध्यक्ष के पद खाली हो तो राष्ट्रपति यह अधिकार रखता है कि वह सदन के किसी भी सदस्य को लोकसभा की अध्यक्षता व् उप-अध्यक्षता सौंप सकता है। ठीक इसी प्रकार राजयसभा के सभापति तथा उप-सभापति के रिक्त पदों (सदन) की अध्यक्षता किसी भी सदस्य को सौंप सकता है।

वित्तीय शक्तियां 

  • राष्ट्रपति की पूर्वानुमति के बिना धन विधेयक संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है।
  • राष्ट्रपति के द्वारा ही केंद्रीय बजट को संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
  • राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना किसी भी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती।
  • राष्ट्रपति के द्वारा ही वित्त आयोग का गठन किया जाता है जिसका मुख्य कार्य केंद्र व राज्य के मध्य राजस्व का बँटबारा करना होता है।

न्यायिक शक्तियां 

  • उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है।
  • उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है।
  • राष्ट्रपति की यह न्यायिक शक्ति है कि वह किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध व्यक्ति के दण्डादेश को निलंबित कर सकता है, माफ़ या परिवर्तित कर सकता है, दण्ड में क्षमादान कर सकता है, प्राणदण्ड रोक सकता है, राहत और माफ़ी प्रदान कर सकता है।

ऊपर बताई गई राष्ट्रपति की दण्ड निलंबित आदि करने की शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में कर सकता है जिनका वर्णन अनुच्छेद 72 में किया गया है –

  1. जब सजा सैन्य न्यायालय ने दी हो।
  2. केंद्रीय विधियों के विरुद्ध सजा दी गई हो।
  3. जब किसी अपराधी को प्राणदण्ड दिया गया हो।

कूटनीतिक शक्तियां 

राष्ट्रपति की सहमति के बिना अंतराष्ट्रीय समझौते या संधिया नहीं किये जा सकती क्यूंकि यह राष्ट्रपति के नाम पर ही किये जाते है और इन समझौतों या संधियों को करने के लिए संसद की अनुमति भी अनिवार्य है।

सैन्य शक्तियां 

भारत के सभी सैन्य बलों का सर्वोच्च सेनापति राष्ट्रपति होता है। सैन्य बालों के प्रमुखों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है। राष्ट्रपति संसद की अनुमति के साथ किसी भी युद्ध की समाप्ति या नए युद्ध की घोषणा कर सकता है।

आपातकालीन शक्तियां 

भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को 3 स्थितिओं में आपत्कालिक शक्तियां बताई गई है जोकि निम्नलिखित है –

  1. राष्ट्रिय आपातकाल (अनुच्छेद 352)
  2. राष्ट्रपति शासन  (अनुच्छेद 356, 365)
  3. राष्ट्रिय आपातकाल (अनुच्छेद 360)

इसके अतरिक्त भारतीय संविधान में भारत के राष्ट्रपति की वीटो शक्ति के बारे में भी बताया गया है जिसका प्रयोग वह संसद तथा राज्य विधायिका में करता है।

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