वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत | f w taylor | Public Administration

वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत

वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत

वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत | f w taylor | Public Administration

वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत – f.w टेलर ने वैज्ञानिक प्रबंध का विकास किया और उन्हें इसका जनक भी माना जाता है। f.w. टेलर के अनुसार काम करने के पुराने तरीकों को छोड़कर नए अथवा वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना ही वैज्ञानिक प्रबंध है उन्होंने एक मीदवेल स्टील कंपनी में रहकर कई प्रकार के अध्ययन किए टेलर के इन अध्ययनों को वैज्ञानिक प्रबंध का हृदय कहा जा सकता है उन्होंने संगठन के आंतरिक कार्यों को दो भागों में बांटा जिसमें पहला नियोजन था तथा दूसरा कार्यात्मक था।

  1. नियोजन – जब उच्च प्रबंधक वर्ग विभिन्न विषयों पर सोच विचार करते हैं तो वह नियोजक के अंतर्गत आता है।
  2. कार्यात्मक – कार्यात्मक वर्ग में श्रमिक वर्ग सम्मिलित होता है।

f.w. टेलर के वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत की विशेषताएं

वैज्ञानिक प्रबंध की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है –

  • इसमें एक नियोजित एवं निश्चित योजना पाई जाती है।
  • वैज्ञानिक प्रबंध में उद्देश्यों की पूर्ति पर अधिक ध्यान दिया जाता है
  • वैज्ञानिक प्रबंध की प्रकृति परिवर्तनशील है
  • वैज्ञानिक प्रबंध में काम का विभाजन किया जाता है और यह विभाजन वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है।
  • वैज्ञानिक प्रबंध में काम करने के पुराने तरीकों को छोड़कर नए तरीकों को अपनाया जाता है।
  • इसमें कार्य करने के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाता है।
  • वैज्ञानिक प्रबंध में कार्य करने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
  • वैज्ञानिक प्रबंध में उत्पादकता पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
  • वैज्ञानिक प्रबंध में आधुनिकता पर अधिक बल दिया जाता है।

वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत

कार्यों को वैज्ञानिक रूप से बांटना – वैज्ञानिक प्रबंध का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि इसमें कार्य को कर्मचारियों में वैज्ञानिक ढंग से बांटा जाता है। इसमें कार्य करने के पुराने तरीकों को छोड़कर नए तरीकों को अपनाया जाता है। इसके साथ ही कार्य करने के लिए आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है तथा इसमें उत्पादकता पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

कार्य अनुमान – वैज्ञानिक प्रबंध के अंतर्गत किसी कार्य का पहले से अनुमान लगाया जाता है तो उसे ही कार्य अनुमान कहते हैं। अनुमान के बाद सभी कार्य निर्धारित किए जाते हैं कि किस कर्मचारी को क्या कार्य करना है तथा कितना कार्य करना है ताकि जितना अनुमान लगाया गया है उतना ही उत्पादन हो सके।

प्रयोग – वैज्ञानिक प्रबंध के अंतर्गत प्रयोगों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है प्राय: समय-समय पर प्रयोग किये जाते हैं, ताकि नए सिद्धांत खोजे जा सके और उत्पादकता को और अधिक बढ़ाया जा सके।

आधुनिक मशीनों का प्रयोग – जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि वैज्ञानिक प्रबंध के अनुसार आधुनिक मशीनों तथा उपकरणों का प्रयोग किया जाता है ताकि सभी कार्यकर्ता कम समय में अधिक उत्पादन कर सकें। वैज्ञानिक प्रबंध में मानवता के स्थान पर उत्पादकता को अधिक महत्व दिया जाता है और कई विचारको ने इसकी यही आलोचना की है।

साधारण शब्दों में यदि हम कहे तो कार्य करने के पुराने तरीकों को छोड़कर नए तथा वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना ताकि उत्पादकता में वृद्धि हो सके को ही वैज्ञानिक प्रबंध विचारधारा या सिद्धांत के नाम से जाना जाता है। f.w. के वैज्ञानिक प्रबंध सिद्धांत के अनुसार कार्य करने के जो परंपरागत तरीके और उपकरण है उनको छोड़ दो और नए और वैज्ञानिक को अपना लो।

एफ डब्ल्यू टेलर ने इसके ऊपर परीक्षण भी किया उन्होंने नए तरीके अपनाए और नए और आधुनिक उपकरण भी अपनाएं और उत्पादन में वृद्धि भी हुई लेकिन कई विचारको ने उनकी आलोचना की और कहा कि वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत में मानवता को महत्व नहीं दिया जाता जबकि किसी भी संगठन में मानवता को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

एल्टन मेयो ने अपने मानव संबंध सिद्धांत में कहा है कि संगठन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति है और व्यक्ति से संगठन है संगठन से व्यक्ति नहीं और एल्टन मेयो कि इस बात से कई विचारक सहमत हुए हैं।

अतः हम कह सकते हैं कि f.w टेलर के वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत की कई विचारको ने आलोचना भी की है। लेकिन हम इस बात से इंकार भी नहीं कर सकते कि वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांतों को अपनाएं बिना किसी भी संगठन में उत्पादकता को नहीं बढ़ाया जा सकता और आज के समय में वैज्ञानिक प्रबंध के इन सिद्धांतों को अपनाया जा रहा है तथा आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है हालांकि आज के समय में संगठन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति है और प्रत्येक लोकतांत्रिक देश में इसके ऊपर कानून भी बनाए जा चुके हैं।

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